राजनीती का नाम सुनते ही पहली तस्वीर जो हमारे मानस पटल पर उभरकर आती है वो है- खादी सफ़ेद कपड़ो से सुसोभित काले कारनामो वाला नेता.
हमारे लिए चीजे बिलकुल वैसी ही हो जाती हैं जैसा हमें उनके बारे में पता चलता है या जैसा हम उनके बारे में सोचने लगते हैं. यही दसा आज राजनीती की बन चुकी है. हमने अपने परिवेश से जो कुछ भी सीखा वो बस एक धारणा बनी बात है जो हमें इस पूरे सिस्टम से दूर रखने के लिए समझा दी जाती है. असल में राजनीती एक चुनौती है. मेरे लिए यह देश सेवा का सबसे बढ़िया रास्ता है. सीमा पर बन्दूक लेकर दुश्मन को मार गिराना ही देशभक्ति नही है. देश की रक्षा करना सिर्फ लड़ने का नाम नही है. देश में पल रहे लाखो भूखे लोगो के लिए रोटी नसीब करवाना कही बड़ी देशभक्ति है. हर साल फुटपाथ पर भयानक ठण्ड में मर रहे लोगो के रहने के लिए मकान का इंतजाम करवाना बहुत बड़ी सेवा है. पर ....................
जारी है.............................
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