Monday, 14 November 2011

राजनीती: विकास और सच

राजनीती का नाम सुनते ही पहली तस्वीर जो हमारे मानस पटल पर उभरकर आती है वो है- खादी सफ़ेद  कपड़ो से सुसोभित काले कारनामो वाला नेता. 
हमारे लिए चीजे बिलकुल वैसी ही हो जाती हैं जैसा हमें उनके बारे में पता चलता है या जैसा हम उनके बारे में सोचने लगते हैं. यही दसा आज राजनीती की बन चुकी है. हमने अपने परिवेश से जो कुछ भी सीखा वो बस एक धारणा बनी बात है जो हमें इस पूरे सिस्टम से दूर रखने के लिए समझा दी जाती है. असल में राजनीती एक चुनौती है. मेरे लिए यह देश सेवा का सबसे बढ़िया रास्ता है. सीमा पर बन्दूक लेकर दुश्मन को मार गिराना ही देशभक्ति नही है. देश की रक्षा करना सिर्फ लड़ने का नाम नही है. देश में पल रहे लाखो भूखे लोगो के लिए रोटी नसीब करवाना कही बड़ी देशभक्ति है. हर साल फुटपाथ पर  भयानक ठण्ड में मर रहे लोगो के रहने के लिए मकान का इंतजाम करवाना बहुत बड़ी सेवा है. पर ....................



जारी है.............................

Wednesday, 9 November 2011

सच्चा भगवान्

परिवर्तन प्रकृति का शास्वत नियम है. हमारी इच्छाओं की बारिश में भीगकर कभी कभी अनायास ही कुछ परिवर्तन होने लगते हैं जिन्हें हम होने नही देना चाहते हैं. परन्तु फिर भी किसी मोड़ पर हमे ऐसा लगने लगता है की जो कुछ भी हुआ, कही ना कही हमारे भले क लिए ही हुआ है.
बचपन में हमारी हर एक पूछी गयी बात का हमारे माता पिता बहुत सलीके से सुलझा हुआ जवाब देते हैं और वही हम जब इस लायक होते हैं की उनको कुछ पूछने क लिए हमारी जरुरत महसूस हो तो हम उनके ओल्ड फैशन की कोई मूर्ति समझकर दांत डपट देते हैं. जिस घर में वो अपने ४ ५ बेटो को पाल पोसकर बड़ा करते हैं, वही चार पांच लोग समय आने पर इन दो बुजुर्गो को नही रख पाते.
मुझे समझ नही आता की आखिर क्यों हमारे अन्दर इतना परिवर्तन हो जाता है की हम अपने माँ बाप जो कभी हमारे आदर्श रहा करते थे, उन्हें इस कदर दुत्कारते हैं. घिन आती है ऐसे तथा कथित सामजिक लोगो पे जो समाज   और माता पिता को एक तराजू में रखकर अपने स्टेट्स को चुनते हैं.

परिवर्तन जरुरी है परन्तु तभी जब ये सही विचारों का हो, अन्यथा ये हमारे आने वाले समाज क लिए विसंकारी होंगे.  अगर आप ऐसे नही हैं तो मेरे लिए आपकी इज्जत बहुत ज्यादा है परन्तु अगर आप इनमे से किसी भी तरह अपने माता पिता को दुखी करते हैं तो मेरी आपसे प्रार्थना है की उन्हें अपना भगवान् मानिए. 
भगवान् आपको अपना मानेगा...........................